रविवार, मई 26, 2024
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2121 कुंडीय विराट महायज्ञ की पूर्णाहुति पर अवध में गूंजें कनक बिहारी महाराज के जयकारे

अयोध्या:-2121 कुंडीय विराट महायज्ञ की पूर्णाहुति पर अवध में गूंजें कनक बिहारी महाराज के जयकारे

भंडारे में शामिल हुए अयोध्या के कई प्रमुख बड़े स्थानों के संत, महंत और महामंडलेश्वर, 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पाई प्रसादी* मनोज तिवारी ब्यूरो प्रमुख अयोध्या तपस्वी संत के संकल्प को पूरा करने के लिए कोई समाज किस तरह अपनी श्रद्धा, आस्था और विश्वास के साथ सर्वस न्योछावर कर देती है इसकी मिसाल अयोध्या में रविवार को संपन्न हुए विराट 2121 कुंडीय श्री राम महायज्ञ की पूर्णाहुति पर देखने मिली, जब हजारों संतों के बीच रघुवंशी समाज ने यज्ञ की प्रेरणा और संकल्प लेने वाले ब्रह्मलीन यज्ञ सम्राट कनकबिहारीदास महाराज के जयकारों से अवध को गूंजा दिया। महायज्ञ के प्रारंभ से लेकर पूर्ण आहुति तक यज्ञ की शोभा बढ़ाने पधारे अयोध्या के संतों, महंतों, और महामंडलेश्वरों ने भी यज्ञ के निर्विघ्न सफलतापूर्वक संपन्न होने पर रघुवंशी समाज को बधाइयां दीं। महायज्ञ की पूर्णाहुति पर मध्य प्रदेश सहित कई प्रांतों से आए रघुवंशी समाज के बंधुओं ने सहभागिता की। ब्रह्मलीन होने से पहल् कनकबिहारीदास महाराज राम जन्मभूमि न्यास को रघुवंशी समाज की ओर से एक करोड़ 11 लख रुपए मंदिर निर्माण में सौंप चुके थे। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े एक फैसले में जब राम के वंशजों का प्रमाण मांगा था तब उस समय भी करीब 10000 हजार रघुवंशियों को साथ लेकर प्रमाण लेकर अयोध्या पहुंच गए थे।मालूम हो कि अयोध्या की बड़ी छावनी में 10 फरवरी से प्रारंभ हुए विराट 2121 कुंडीय श्री राम महायज्ञ की पूर्णाहुति रविवार को पूर्ण हुई। अयोध्या में भगवान रामलला की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण पूरा होने पर रघुवंश संत कनकबिहारी दास महाराज ने रघुवंशी समाज से रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की धन्यता पर विराट श्री राम महायज्ञ करने का संकल्प लिया था लेकिन यज्ञ की तैयारी के दौरान करीब 9 महीने पहले एक सड़क हादसे में वह ब्रह्मलीन हो गए थे। संत के संकल्प को पूरा करने के लिए रघुवंशी समाज ने यज्ञ को पूरा करने का बीड़ा उठाया। और काशी से आए यज्ञाचार्य डॉ प्रेम नारायण शास्त्री प्रेमाचार्य ने बताया कि पूर्णाहुति के दिन सभी यजमान राजा रानियों के अलावा पूर्णाहुती के यजमानों ने भी यज्ञ में आहुतियां दीं। पूरे यज्ञ के दौरान विश्व कल्याण की भावना के साथ सवा करोड़ से अधिक श्री राम नाम की आहुतियां छोड़ी गईं। यज्ञ के पहले दिन कलश यात्रा के दौरान सरयू का जल भरकर पीले वस्त्रों में रघुवंशी समाज की महिलाएं सिर पर कलश लेकर अवध की गलियों में कलश लेकर करीब 5 किलोमीटर का सफर तय करके यज्ञ स्थल पहुंची तो पूरे अवध क्षेत्र में यात्रा को लेकर संतों और अवधवासियों के बीच चर्चा का केंद्र रही। भगवान रामलला के भव्य मंदिर का दर्शन करने के लिए अयोध्या पहुंच रहे विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालु भी यज्ञ का दर्शन करने के लिए पहुंचे। *राम जन्मभूमि न्यास सहित कई संस्थाओं ने भंडारे में दी सेवाएं* यज्ञ समिति समिति के मीडिया प्रभारी देवेंद्र रघुवंशी ने बताया कि अवध क्षेत्र के इतिहास में पहली बार आयोजित हुए विराट श्री राम महायज्ञ में केवल अवध वासियों का ही सहयोग नहीं मिल रहा था बल्कि राम जन्मभूमि न्यास तीर्थ क्षेत्र ने भी भंडारे के लिए 120 कुंटल आटा भेंट किया। वहीं दिल्ली की मां झंडे वाली समिति ने पूरे समय यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं को मन भरकर मीठी चाय और टोस्ट की सेवाएं दीं। प्रतिदिन यज्ञ में दोनों समय 15 से 20 हजार से अधिक लोगों को प्रसादी ग्रहण कराई जाती थी। यज्ञ के पूरे समय अयोध्या नगर निगम, पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरी मुस्तादी के साथ अपनी सेवाएं दीं। पुलिस प्रशासन ने यज्ञ स्थल पर ही 25 जवानों की टीम के साथ कंट्रोल रूम स्थापित किया। वही नगर निगम अयोध्या की टीम ने जल व्यवस्था के अलावा साफ सफाई में सरायनीय सहयोग दिया। यज्ञ स्थल पर ही यजमानों के आवास के लिए टेंट सिटी बसाई गई थी जिसमें सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीसीटीवी कैमरों के अलावा निजी सुरक्षा कंपनी के 25 गार्डों की सेवाएं ली गईं थी। महायज्ञ की पूर्णाहुति पर मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, विदिशा अशोकनगर, गुना,नर्मदापुरम, रायसेन, छिंदवाड़ा, धार, जबलपुर अलावा उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बनारस, गुजरात, अहमदाबाद, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान सहित कई प्रांतों से आए रघुवंशी समाज के बंधुओं ने सहभागिता की। *यज्ञ के निर्विघ्न संपन्न होने पर समिति ने माना सबका आभार*यज्ञ के निर्विघ्न सफलतापूर्वक संपन्न होने पर समिति ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले रघुवंशी समाज सहित अन्य समाजों, दान दाताओं, संतों महंतों का आभार माना है। महायज्ञ की पूर्णाहुति पर आयोजन की शोभा बढ़ाने आए अवध क्षेत्र के सभी बड़े स्थानों,अखाड़ों के संतों, महंतों और महामंडलेश्वरों को भंडारे में प्रसादी के बाद उनको साकेतवासी कनकबिहारी दास महाराज के उत्तराधिकारी महंत श्यामदास महाराज, लखनदा छोटे बाबा, पटेल बाबा ने सभी संतों को भंडारे की प्रसादी के उपरांत यथा सम्मान विदाई दी गई। महायज्ञ में अखाड़ा परिषद हनुमानगढ़ी के पूर्व अध्यक्ष ज्ञानदास महाराज, तेरह भाई त्यागी अखाड़े के प्रमुख बृजमोहनदास, श्रीमहंत रामचरणदास पुजारी महाराज, महंत परशुरामदास महाराज, मौनी माझा के महंत रामप्रिय दास जी सहित करीब 3000 संतों और ब्राह्मणों ने भंडारे में प्रसादी ग्रहण की। यज्ञ संचालन केंद्रीय समिति सदस्यों की ओर से कथावाचक जगतगुरु कामदगिरि पीठाधीश्वर रामस्वरूपाचार्य महाराज, महेंद्र श्याम दास महाराज महंत रामकिशोर दास महाराज, यज्ञाचार्य प्रेमाचार्य, कथावाचिका रामाकिशोरी, यज्ञ के मुख्य संरक्षक पूर्व संसदीय सचिव अजय सिंह रघुवंशी एवं मुख्य यजमान मुनिराज पटेल छिंदवाड़ा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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