गुरूवार, जून 13, 2024
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राम भी आये और पलटू राम भी

राम भी आये और पलटू राम भी आये..

न्यूज़ समय तक लोकसभा चुनाव के भय से नीतीश के लिए खुला एनडीए का दरवाजा… इंडी अलायंस की संरचना करने वाले नीतीश ने क्यों छोड़ा महागठबंधन का साथ..! बार-बार नीतीश को समर्थन देकर मुख्यमंत्री बनाने वाले नेताओं को दी जाएगी पलटूराम की संज्ञा..? उत्तर प्रदेश में स्थित धर्म नगरी अयोध्या में भगवान श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 22 जनवरी को संपन्न होने के साथ ही एक बार फिर बिहार की सियासत गर्म हो गई थी और एक सप्ताह के भीतर ऐसा घटनाक्रम देशवासियों के सामने आया जो बीती 28 जनवरी को समाप्त भी हो गया।* ज्ञात हो कि एनडीए के विपक्ष में विभिन्न राजनीतिक दलों को एकजुट कर इंडी अलायंस बनाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है और विभिन्न पार्टियों को एकजुट करने का काम भी नीतीश कुमार ने बखूबी निभाया। बिहार में जो घटनाक्रम एक सप्ताह के भीतर घटित हुआ वह पूरे देशवासियों के लिए बड़ा संदेश है कि राजनीति में सब कुछ जायज है…! वर्ष 2013 में जब भाजपा ने तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया तो नीतीश कुमार ने इसका विरोध किया और लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से हाथ मिलाकर महा गठबंधन की सरकार बिहार में स्थापित कर दी थी। इसके बाद वर्ष 2015 में लालू प्रसाद यादव से मनमुटाव होने के बाद नीतीश कुमार ने एक बार फिर पलटी मारी और एनडीए का दामन थाम लिया। इसके बाद वर्ष 2017 में फिर लालू प्रसाद यादव के साथ हाथ मिलाया और करीब दो वर्ष सरकार चलाने के बाद वर्ष 2019 में पुनः एनडीए में शामिल हो गए। इसके बाद एक बार फिर नीतीश कुमार का एनडीए गठबंधन से मोहभंग हुआ और 2022 में लालू प्रसाद यादव के समर्थन से बिहार के मुख्यमंत्री बने। नीतीश कुमार का बार-बार यू टर्न लेने वाला घटनाक्रम 24 जनवरी को एक बार फिर देशवासियों के सामने नजर आया जब महान समाजवादी नेता एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की जन्म शताब्दी के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने कपूरी ठाकुर को भारत रत्न सम्मान से नवाजा। कर्पूरी ठाकुर की जन्म शताब्दी के बाद बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया और पांच दिनों के भीतर ही नीतीश कुमार का महागठबंधन से मोह भंग हो गया और उन्होंने बीते रविवार को महा गठबंधन की सरकार से इस्तीफा देकर एक बार फिर एनडीए के समर्थन से बिहार के मुख्यमंत्री बन गए। इस घटनाक्रम के दौरान जहां लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने नीतीश कुमार के खिलाफ कोई भी बयान बाजी नहीं की और महागठबंधन की सरकार सत्ता में काबिज रहेगी ऐसा लोगों को भरोसा दिलाते रहे। वहीं दूसरी ओर जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार की चुप्पी भी चर्चा में छाई रही। हालांकि जनता दल यूनाइटेड के नेता भी इस मामले में खुलकर कुछ भी नहीं बोल रहे थे, किंतु लालू प्रसाद यादव एवं उनके पुत्र उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर जमीन लेकर नौकरी देने समेत अन्य प्रकार के दबाव की बात कह कर लोगों को गुमराह करते रहे। एक तरफ जहां अयोध्या में भगवान श्री राम आए तो वहीं दूसरी तरफ एक सप्ताह के भीतर एनडीए में पलटू राम भी शामिल हो गए…! हम आपको यह भी बता दे की नीतीश कुमार केंद्रीय रेल मंत्री के पद पर रह चुके हैं। इसके अलावा नौ बार मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हो चुके हैं। ठीक लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में जो घटनाक्रम हुआ वह इतिहास के पन्नों में दर्ज किया जाएगा और सीएम पद पर लगातार काबिज रहने की नीतीश कुमार की महारत को भी लोग पलटूराम के नाम से याद करते रहेंगे…! अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ नीतीश कुमार ही पलटू राम की संज्ञा से नवाजे जाते रहेंगे या फिर कभी एनडीए तो कभी महा गठबंधन में शामिल होकर बार-बार मुख्यमंत्री का दायित्व सौंपने वाली भाजपा, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल समेत अन्य विपक्षी पार्टी भी पलटूराम की संज्ञा से नवाजी जायेंगी..!

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