मंगलवार, अप्रैल 23, 2024
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रामकथा पार्क में निधि के नृत्यों की स्तुतियो ने मोहा

अयोध्या: रामकथा पार्क में निधि के नृत्यों की स्तुतियो ने मोहा

न्यूज़ समय तक रामकथा पार्क में हुई त्रियुगीनाथ की स्तुति,राजस्थान,उत्तराखंड और कथक के रंग में रंगा रामकथा पार्क*मनोज तिवारी ब्यूरो चीफ अयोध्याप्राण प्रतिष्ठा के उल्लास से सराबोर अयोध्या के राम कथा पार्क में बीती शाम लखनऊ से आए गुलशन चौधरी और उनके कलाकारों ने राम भजन गाकर सभी को रामरस का आस्वादन करा दिया। जपता है श्री राम की माला गाकर सभी किनास्था और उसके बाद नगरी हो अयोध्या सी गाकर उन्होंने श्रद्धालुओं अयोध्या के वैभव के दर्शन करा दिए। इसी भाव में मानस की चौपाइयां राम सिया राम जय जय राम गाकर सभी को साथ देने पर विवश कर दिया।अगली प्रस्तुति में कथक घराने का प्रतिनिधित्व करते हुए अनेश रावत के दल राम स्तुति पर कथक नृत्य करके सभी को भावुक कर दिया उसके बाद राम वंदना करके पूरे वातावरण में भक्ति का माहौल घोल दिया। इन्हीं कलाकारों ने राम रावण युद्ध के प्रसंग को लंका कांड की चौपाइयों के साथ जब प्रस्तुत किया तो सभी दर्शक अपलक प्रस्तुति को देखते ही रह गए। *तालियों की गूंज में*उत्तराखंड के कलाकारों ने आशुतोष नौटियाल के निर्देशन में बधाई नृत्य प्रस्तुत करके उत्तराखंड की परंपरा दिखाई तो उसी के साथ भगवान त्रियुगी नारायण की स्तुति करके तीनों लोकों में व्याप्त परमात्मा से सभी के मंगल की कामना की। सृष्टि, पिंगला और सुषमा तीन पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करती हुई कलाकारों ने मंच पर संस्कारो की एक आभा सी बिखेर दी और सभी इन कलाकारों के उत्साह और प्रदर्शन पर वाह वाह कर उठे।ढलती शाम के साथ चरम पर पहुंचते हुए कार्यक्रम में मंच पर मोहिनी द्विवेदी और उनके साथी कलाकारों ने एक के बाद एक राम भजन प्रस्तुत करके श्रोताओं को अपने साथ नृत्य करने पर विवश कर दिया । नगरी हो अयोध्या सी और उसके बाद आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया गाकर सभी को प्रभु राम की मोहनी सूरत के दर्शन कर दिए। अभी श्रोता इससे उबर ही नही पाए थे तब तक उन्होंने राम जी से पूछे जनकपुर के नारी गाकर भगवान श्री राम को जन-जन के राम बनाते हुए दर्शकों के उल्लास से परिचित कराया। पद्मश्री अनूप जलोटा की शिष्या मोहिनी द्विवेदी ने प्राण प्रतिष्ठा के अनुरूप धनी धनी चैत्र महिनवा और दशरथ के भइले ललनवा जैसे पारंपरिक सोहर गाकर सभी को मुग्ध कर दिया।राजस्थान से आए हीरा नाथ के दल की नृत्यांगनाओं ने मंच पर नृत्य करते हुए आंखो की पुतली से दो अंगूठियां उठा कर सभी को हतप्रभ कर दिया।सभी विस्मय से चकित होकर तालियां बजा कर पारंपरिक लोक नृत्य और कलाकारो का सम्मान कर रहे थे। राजस्थान की स्वरलहरियां और पोषक ने सभी को मानो लुभा लिया था।लखनऊ से आई निधि श्रीवास्तव के दल के कलाकारो ने इसके बाद मंच पर शास्त्रीय और लोक नृत्यों के अनूठे प्रयोग से गणेश वंदना और शिव स्तुति करके मंच पर गणपति और शिव के साक्षात दर्शन करा दिए।राम स्तुति में लोक का निश्चल रूप प्रस्तुति के छलक कर बाहर आ रहा था। कलाकारो के प्रदर्शन ने सभी को अभिभूत कर दिया।अंतिम प्रस्तुति उज्जैन से आए लोकगुंजन दल ने को।राजस्थानी लोक गीतों नाच बनी पर सर पर घड़े में आग रखकर किया गया नृत्य और फिर समूह में चिरमी के बोलो पर नृत्य ने पूरे पांडाल को तालियों से गुंजा दिया।कार्यक्रम का संचालन अपने विशिष्ट अंदाज में आकाशवाणी के उद्घोषक देश दीपक मिश्र ने किया। कलाकारो का सम्मान कार्यक्रम समन्वयक अतुल कुमार सिंह ने स्मृति चिह्न प्रदान करके किया।इस अवसर पर शिवांश त्रिवेदी,नाथूराम,राकेश,इंद्रा,अनामिका,अनुष्का,अभय सिंह समेत संतजन और दर्शक उपस्थित रहे।

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