न्यूज़ समय तक कानपुर यूजीसी प्रस्ताव वापस न लेने पर हिन्दू रक्षा दल ने आंदोलन की चेतावनी दीकानपुर। हिन्दू रक्षा दल ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित यूजीसी (UGC) से जुड़े कानून/प्रावधानों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विरोध प्रदर्शन और जनआंदोलन की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि इतने संवेदनशील सामाजिक विषय पर बिना व्यापक जनसंवाद और विशेषज्ञ परामर्श के आगे बढ़ना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।हिन्दू रक्षा दल के जिला अध्यक्ष नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण कानून को लागू करने से पहले विधि विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से संवाद आवश्यक है। उनका आरोप है कि वर्तमान स्थिति में यह प्रक्रिया पर्याप्त रूप से होती नहीं दिखाई दे रही।उन्होंने संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि • अनुच्छेद 25 नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता देता है, • अनुच्छेद 29 सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा करता है, • तथा अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।उनके अनुसार यदि कोई प्रस्तावित कानून समाज की परंपराओं, सांस्कृतिक ढांचे या वैचारिक स्वतंत्रता को प्रभावित करता है, तो उस पर खुली बहस और आवश्यक संशोधन की गुंजाइश रहनी चाहिए।हिन्दू रक्षा दल की महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष रीना मिश्रा ने भी सरकार पर जल्दबाज़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस विषय में धैर्य, संवाद और सर्वसम्मति अधिक आवश्यक है। उनका कहना है कि किसी भी कानून का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द, पारिवारिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना होना चाहिए, न कि भ्रम और असंतोष को जन्म देना।वहीं संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंकी चौधरी ने सरकार के समक्ष निम्न प्रमुख माँगें रखीं: 1. प्रस्तावित कानून की संसदीय समिति द्वारा पुनः विस्तृत समीक्षा 2. सभी सामाजिक और धार्मिक संगठनों से औपचारिक परामर्श 3. संभावित सामाजिक प्रभावों पर श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया जाए 4. व्यापक सहमति बनने तक कानून लागू न किया जाएआंदोलन की रूपरेखा (यदि माँगें नहीं मानी गईं)हिन्दू रक्षा दल ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूर्णतः लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा। प्रस्तावित कार्यक्रमों में शामिल हैं: • जिला स्तर पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपना • संविधान एवं कानून विशेषज्ञों के साथ जनजागरण सभाएँ • शांतिपूर्ण धरना और सत्याग्रह • कानूनी व तथ्यात्मक जानकारी के साथ सामाजिक जागरूकता अभियानजिला अध्यक्ष नीरज श्रीवास्तव ने दोहराया कि संगठन लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखता है और उसका हर कदम संवैधानिक दायरे में होगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए संवाद का मार्ग अपनाया जाए, ताकि किसी प्रकार का सामाजिक तनाव उत्पन्न न हो।



