मंगलवार, जून 18, 2024
spot_imgspot_imgspot_img
होमअनोखाभ्रष्टाचार कथा अनंता : दस साल में बीस लाख करोड़

भ्रष्टाचार कथा अनंता : दस साल में बीस लाख करोड़

न्यूज़ समय तक भ्रष्टाचार कथा अनंता : दस साल में बीस लाख करोड़!**(टिप्पणी : संजय पराते

भाजपा का “चाल, चेहरा और चरित्र” स्पष्ट है। विश्व की कथित रूप से सबसे बड़ी पार्टी और उसकी मातृ संस्था आरएसएस वास्तव में विश्व की सबसे अमीर पार्टी और संस्था है, तो यह अब कोई रहस्य नहीं है। यह अमीरी इस पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता के दान पर नहीं, बल्कि आम जनता और देश के संसाधनों की लूट पर टिकी हुई है। इस लूट से कॉरपोरेट, विशेषकर मोदी के प्रिय पात्र अडानी और अंबानी, मालामाल हुए हैं। इतने मालामाल हुए हैं कि इन दस सालों में दुनिया के सबसे बड़े धन पिशाचों की लाइन में खड़े हो गए हैं, तो उन्हें उपकृत करने वाला संघ-भाजपा भी दुनिया की सबसे अमीर संस्था और राजनैतिक दल बन गए हैं। एक गरीब देश की इतनी बेरहम और बेशर्म लूट शायद अंग्रेजों के समय भी न हुई हो।वेबसाइट corruptmodi.com ने पिछले दस सालों में केंद्र सरकार और राज्यों में भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए विभिन्न घपले-घोटालों, अनियमितताओं और गड़बड़ियों के जो विवरण एकत्रित किए हैं, उन्हें ही जोड़ा जाएं, तो ये घपले-घोटाले-भ्रष्टाचार मोटे तौर पर 10 लाख करोड़ रुपए के होते हैं। पिछले 10 सालों में ऐसा कोई माह नहीं था, जब भाजपा राज का कोई भ्रष्टाचार उजागर नहीं हुआ हो और ऐसा कोई साल नहीं था, जब देश और यहां की जनता को एक लाख करोड़ रुपयों का चूना न लगा हो।इस वेबसाइट द्वारा जिन घपलों-घोटालों को संकलित किया गया है, उन घोटालों में केंद्र और विभिन्न राज्यों में संघ-भाजपा सरकार की सीधी मिलीभगत रही है। ये घोटाले राष्ट्रीय मीडिया में बड़े पैमाने पर उछले हैं, इसके बावजूद किसी भी मामले में किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसके अलावा, ऐसे अनगिनत मामले हैं, जिन्हें गोदी मीडिया द्वारा शातिराना तरीके से दबा दिया गया है और “विपक्ष के अनर्गल आरोप मात्र” के रूप में प्रचारित किया गया है। वेबसाइट द्वारा संकलित घोटाले भ्रष्टाचार रूपी हिमशैल का वह ऊपरी हिस्सा है, जो दिखाई देता है। हिमशैल का निचला हिस्सा तो ‘भ्रष्टाचार कथा अनंता’ है। हम कितना ही उदार हो जाएं, यह अदृश्य राशि भी दृश्य राशि से ज्यादा ही होगी। इस प्रकार, भाजपा की भ्रष्टाचार कथा कम से कम 20 लाख करोड़ रुपयों के घपले-घोटालों की कथा है। 2 के बाद 13 शून्य लगाने से बनी संख्या 20 लाख करोड़ रुपए कितने होते हैं? इसे जानने के लिए हम अपनी अर्थव्यवस्था और बजट का सहारा ले सकते हैं। यह इतनी बड़ी राशि है कि वर्ष 2023-24 के कुल बजट व्यय का लगभग आधा और वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट के पूंजीगत व्यय का लगभग दुगुना है। यह राशि हमारे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6% से ज्यादा है। यह इतनी बड़ी राशि है कि हमारे 23 सालों का मनरेगा बजट या स्वास्थ्य बजट या कृषि कल्याण मंत्रालय का 16 सालों का बजट इसमें समा जाएं। यह इतनी बड़ी राशि है कि इससे 172 सालों तक मध्यान्ह भोजन योजना या 94 सालों तक आंगनबाड़ियों के जरिए बाल विकास योजनाएं चलाई जा सकती है। इस राशि से देश के 11 लाख सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को आदर्श स्कूलों के रूप में विकसित करके अगले 18 सालों तक गुणवत्तापूर्ण स्कूली और उच्च शिक्षा का इंतजाम किया जा सकता था। इस राशि से केंद्र सरकार अगले 10 सालों तक गरीबों के लिए खाद्य सब्सिडी का इंतजाम कर सकती थी। इस राशि से अगले 37 सालों तक ग्रामीण आवास की जरूरतों को पूरा किया जा सकता था। इस राशि से अगले 3-4 सालों तक 5000 रूपये प्रति माह के हिसाब से देश के 10 करोड़ नौजवान बेरोजगारों और वयोवृद्धों को बेरोजगारी भत्ता या पेंशन दी जा सकती थी। यह राशि देश के किसानों को दी जा रही तथाकथित सम्मान निधि के 33 सालों के बजट के बराबर है। यह राशि देश के सबसे निचले स्तर पर जिंदा रहने की जद्दोजहद कर रहे 28 करोड़ लोगों की सम्मिलित आय के बराबर है।इन तथ्यों के सहारे समझा जा सकता है कि ‘विकसित भारत’ की जुमलेबाजी करने वाली भाजपा द्वारा देश को इन दस सालों में कितने बड़े पैमाने पर लूटा गया है। वास्तव में भाजपा ने आम जनता के उस सपने के साथ दगाबाजी की है, जो भारत को मानव विकास सूचकांक के पैमाने पर एक विकसित भारत के रूप में देखना चाहती है। भाजपा इन लोकसभा चुनावों में ‘कॉरपोरेट भारत’ और देश के संसाधनों की कॉरपोरेट लूट के लिए जनादेश चाहती है, जिसके जरिए वह अगले 23 सालों में अपने लिए 50 लाख करोड़ रुपए और लूट सके। लेकिन आम जनता भाजपा को इसका मौका नहीं देने वाली है।यही कारण है कि इन चुनावों के अंतिम दौर तक उसने अपनी 10 साल की उपलब्धियों पर कोई बात नहीं की है। पिछले दो चुनावों में उसने जितने भी वादे किए थे, आज वह इन वादों पर खामोश है। उसके एजेंडे में वे मुद्दे हैं, जो लोगों को जाति, धर्म और नफरत के आधार पर बांट सके। प्रधानमंत्री के मुंह से मछली, मटन, मुर्गा, मंदिर, मुस्लिम, मुजरा जैसे शब्दों की बौछार हो रही है और आम जनता उनकी हो रही जगहंसाई देख रही है। अब यह स्पष्ट है कि आजादी के 75 सालों बाद भी संघी गिरोह संविधान में निहित सामाजिक न्याय, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और भाईचारा जैसे मूल्यों को आत्मसात नहीं कर पाया है। आज भी वह मनु की उस वर्णवादी व्यवस्था को आगे बढ़ाना चाहती है, जिसकी पैरोकारी वह आजादी से पहले करती थी। भाजपा और संघी गिरोह का सपना एक विकसित और वैज्ञानिक दुनिया में ‘हिन्दू राष्ट्र’ के नाम पर एक”अविकसित और मूढ़ भारत” बनाने का सपना है। भारत की जनता निर्णायक रूप से इस संघी सपने को ठुकराने और एक शोषण विहीन और समानता पर आधारित भारत के निर्माण के संघर्ष को बढ़ाने के लिए तैयार है। 4 जून को देश की जनता इसी की घोषणा करने जा रही है।*(टिप्पणीकार अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)**********Bhrashtachar Katha Ananta: Twenty lakh crores in ten years!**(A comment by Sanjay Parate)*BJP’s “Chaal, Chehra and Charitra” is clear. It is no longer a secret that the world’s so-called biggest party and its parent organization RSS is actually the world’s richest party and organization. This wealth is not based on the donations of the party workers and the general public, but on the loot of the common people and the country’s resources. Due to this loot, the corporates, especially Modi’s favorite friends Adani and Ambani, have become rich, so rich that in these ten years they have become one of the world’s biggest money vampires, and the Sangh-BJP, which obliged them, has also become the world’s richest organization and political party. Such ruthless and shameless loot of a poor country may not have happened even during the British rule.If the details of various scams, corruption and irregularities that have taken place during the tenure of BJP government at the centre and in states in the last ten years, collected by the website corruptmodi.com, are added, then these scams, corruptions and frauds roughly amount to Rs. 10 lakh crores. There was not a single month in the last 10 years when some corruption of BJP rule was not exposed and there was not a single year when the country and its people were not cheated of Rs. 1 lakh crores.The combined amount of scams and frauds collected by this website is above Rs. 10 lakh crores. The Sangh-BJP government at the centre and in various states has been directly involved in these scams. These scams have been highlighted on a large scale in the national media, yet no action has been taken against anyone in any of the cases. Besides, there are countless cases which have been cunningly suppressed by the Godi media and propagated as “mere baseless allegations of the opposition”. The scams compiled by the website are the upper part of the corruption iceberg, which is visible. The lower part of the iceberg is ‘Bhrashtachar Katha Ananta’. However generous we may be, this invisible amount will still be more than the visible amount. Thus, the bhrashtachar katha of the BJP is the story of scams and frauds worth at least Rs 20 lakh crore.How much is the number 20 lakh crore rupees, formed by adding 13 zeros after 2? To know this, we can take the help of our economy and budget. This is such a huge amount that it is almost half of the total budget expenditure of the year 2023-24 and almost double the capital expenditure of the interim budget of the year 2024-25. This amount is more than 6% of our gross domestic product (GDP). This is such a huge amount that it can cover our 23 years of MNREGA or health budget or 16 years of Agriculture Welfare Ministry’s budget. This is such a huge amount that it can run the mid-day meal scheme for 172 years or child development schemes through Anganwadis for 94 years. With this amount, 11 lakh government and government-aided schools of the country could be developed as model schools and quality school and higher education could be arranged for the next 18 years. With this amount, the central government could arrange for food subsidy for the poor for the next 10 years. With this amount, the needs of rural housing could be met for the next 37 years. With this amount, unemployment allowance or pension could be given to 10 crore young unemployed and elderly people of the country at the rate of Rs 5000 per month for the next 3-4 years. This amount is equal to the 33 years budget of the so-called Samman Nidhi being given to the farmers of the country. This amount is equal to the combined income of 28 crore people struggling to survive at the lowest level of the country.With the help of these facts, it can be understood that the BJP, which makes the jumlebaji of ‘developed India’, has looted the country on a large scale in these ten years. In reality, the BJP has betrayed the dream of the common people, who want to see India as a developed India on the scale of Human Development Index. In these Lok Sabha elections, the BJP wants a mandate for ‘corporate India’ and corporate loot of the country’s resources, through which it can loot another 50 lakh crore rupees for itself in the next 23 years. But the common people are not going to give BJP this opportunity.This is the reason that till the last round of these elections, it has not talked about its achievements of 10 years. Whatever promises it had made in the last two elections, today it is silent on these promises. Its agenda includes those issues which can divide people on the basis of caste, religion and hatred. Words like fish, mutton, chicken, temple, Muslim, mujra are pouring out of the Prime Minister’s mouth and the general public is watching him being ridiculed. Now it is clear that even after 75 years of independence, the Sanghi gang has not been able to imbibe the values of social justice, democracy, secularism and brotherhood enshrined in the Constitution. Even today, it wants to advance the caste system of Manu, which it advocated before independence. The dream of the BJP and the Sanghi gang is to create an “underdeveloped and stupid India” in the name of ‘ Hindu Rashtra’, in a developed and scientific world. The people of India are ready to decisively reject this Sanghi dream and march forward the struggle to create an exploitation-free and equality-based India. The people of the country are going to announce this on June 4.*(Author is the Vice President of Chhattisgarh Kisan Sabha, affiliated to All India Kisan sabha. Contact : 94242-31650)*

RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Most Popular

Recent Comments