शुक्रवार, जून 14, 2024
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कानपुर इतिहास समिति ने भौंती में आजाद स्मारक बनाने की मांग

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चन्द्रशेखर “आजाद” को भी मिले- भारतरत्न प्रताप गोपेन्द्र की पुस्तक चन्द्रशेखर आजाद : मिथक बनाम यथार्थ पर हुई परिचर्चा कानपुर इतिहास समिति ने भौंती में आजाद स्मारक बनाने की मांग की विशेष संवाददाता विनय प्रकाश मिश्रा।**कानपुर। देश हित में प्राणार्पण करने वाले क्रांतिकारियो मे उर्ध्व स्थान रखने वाले अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद को भी भारत रत्न दिया जाए । कानपुर इतिहास समिति द्वारा आयोजित प्रताप गोपेन्द्र की किताब चन्द्रशेखर आजाद मिथक बनाम यथार्थ की परिचर्चा के दौरान यह मांग फिजा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शांतनु त्रिपाठी ने की । नवाबगंज के डिप्टी श्यामलाल के मन्दिर में आयोजित बैठक में मुख्य वक्ता डॉ सुमन शुक्ला बाजपेई ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद मिथक बनाम यथार्थ किताब प्राथमिक स्रोतो पर केन्द्रित है । पूर्वज , जन्म आदि आध्याओ से लेकर वीरगति तक के अध्याय और परिशिष्ट पठनीय है । क्रांतिकारी रामदुलारे त्रिवेदी, विश्वनाथ वैशम्पायन, शिव विनायक मिश्र मनोहर लाल त्रिवेदी सभी ने भौंती को ही पैतृक गांव माना है । जिसकी पुष्टि सी आई डी अधिकारी शंभू नाथ शुक्ल के पत्र से भी होती है । प्रखर श्रीवास्तव ने कहा प्रताप गोपेन्द्र जी ने किताब में शोध निष्कर्षों और स्रोतो के साक्ष्य प्रस्तुत कर पाठकों को निर्णय लेने के लिए छोड़ दिया है । सतीश तिवारी जी ने कहा कि मैं भौंती के उसी परिवार का प्रतिनिधि हूं जिसमें आजाद का जन्म हुआ । विकास बाजपेई के आजाद और भौती किताब लिखने और आजाद चबूतरे के निर्माण के दौरान से जुड़ा रहा । अशोक बाजपेई ने कहा कि आजाद तो पूरे भारत वर्ष के गौरव थे परन्तु मेरे लिए गौरव है कि उनका पैतृक गांव भौती प्रतापपुर था जहां का मैं निवासी हूं । प्रताप गोपेन्द्र की किताब अद्भुत शोध ग्रन्थ है ।अध्यक्षता कर रहे पण्डित विश्वंभर नाथ त्रिपाठी ने कहा कि काकोरी काण्ड के दिलजले पुस्तक में रामदुलारे त्रिवेदी ने लिखा कि ” कानपुर से झांसी जाने वाली सड़क पर कानपुर शहर से कुछ मील दूर स्थित भौती नामक ग्राम में सीताराम तिवारी ने जन्म लिया था श्री चन्द्रशेखर आजाद के यही पिता कुछ दिनों के बाद अपनी ससुराल के ग्राम सरौसी सिकन्दरपुर जिला उन्नाव में आ बसे ।”कानपुर इतिहास समिति के महासचिव अनूप शुक्ल ने कहा कि बनारस में आजाद का साथ देने वाले रिश्तेदार और आजाद की अंत्येष्टि कर्ता पण्डित शिव विनायक मिश्र वैद्य ने अपने लिखा है कि “श्री चन्द्रशेखर आजाद के पूर्वज कानपुर जिले के राउत मसवानपुर के निकट भौंती ग्राम के निवासी कान्यकुब्ज ब्राह्मण तिवारी वंश के थे । श्री देवकी नन्दन मिश्र बदरका वालों की बुआ गोविन्दा भौंती ग्राम में तिवारियों के यहां ब्याही थी । श्रीमती गोविन्दा देवी की कोख से श्री सीताराम तिवारी का जन्म हुआ ।” इसी प्रकार कानपुर के इतिहासविद पण्डित लक्ष्मीकांत त्रिपाठी और बाबू नारायण प्रसाद अरोड़ा ने 1948 में प्रकाशित कानपुर के विद्रोही किताब में भी आजाद का पैतृक ग्राम भौंती प्रतापपुर लिखा है । आजाद कानपुर प्रवास में कई बार अरोड़ा जी के घर पर ठहरे थे आजाद की छूटी हुई एक टोपी बहुत वर्षों तक संरक्षित रही जो अब तिलक हाल कानपुर की अशोक पॉलिटिकल लाइब्रेरी में रखी है । उत्कर्ष त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी प्रताप गोपेन्द्र ने अपनी किताब चन्द्रशेखर आजाद मिथक बनाम यथार्थ में लिखा है कि चन्द्रशेखर आजाद के पूर्वजों से सम्बन्धित खोज के क्रम में दो तथ्य विश्वसनीय जान पड़े। पहला उनके पुरखे भौंती प्रतापपुर के रहने वाले थे, दूसरा उनके दादा का नाम मैकूलाल तिवारी था । इन तथ्यों की जाँच के लिए मैं 4 सितम्बर 2022 को कानपुर इतिहास समिति के महासचिव अनूप शुक्ल के साथ भौंती गया । वहां चन्द्रशेखर आजाद के पिता के हिस्से के खंडहर थे । वहां आजाद के परिवारी जनो में भानु प्रकाश और चंद्रप्रकाश का परिवार है । चन्द्र प्रकाश तिवारी के मुताबिक़ मैकूलाल के पांच पुत्र हुए तुलसीराम, गणेश, नवाब, गुमानी लाल और सीताराम। इनमें से सीताराम जी के पुत्र हुए चन्द्रशेखर आजाद। मैकूलाल के बेटो के नामो की पुष्टि मुआफिज खाना में मौजूद पुरानी खतौनी से भी होती है । बैठक में धर्म प्रकाश गुप्त, गोपाल खन्ना, विनोद टंडन, सुनील मंगल , पुष्कर मिश्र आदि मौजूद रहे।

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