शुक्रवार, जून 14, 2024
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करौली शंकर महादेव ने हजारों भक्तों संग किया ऐतिहासिक तपस पद यात्रा

करौली शंकर महादेव ने हजारों भक्तों संग किया ऐतिहासिक तपस पद यात्रा तपस यात्रा के जरिए सनातन धर्म के प्रति लोगों को जागृत करना व नशा मुक्त-शोक मुक्त व रोग मुक्त का संदेश भारत के कोने-कोने तक पहुंचाने का संकल्प है करौली सरकार काकानपुर के पिपरगंवा करौली स्थित लव कुश आश्रम के करौली धाम के शंकर महादेव के नाम से विश्व विख्यात संतोष सिंह भदोरिया पिछले 3 वर्षों से अपने दैनिक आध्यात्मिक कार्यों व सनातन धर्म की दिशा में वैदिक रीति रिवाज से देश-विदेश के जन कल्याणकारी कार्यक्रमों के तहत देश-विदेश में अक्सर खास चर्चा का विषय बने रहते हैं पिछले वर्ष भी असाध्य रोगियों को वैदिक रीति नीति से मात्र एक ही दिन में चंगा करने को लेकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय टी-वी चैनलों में करौली सरकार के शंकर महादेव काफी सुर्खियों में रह चुके हैं। बावजूद उसके करौली सरकार के शंकर महादेव को अपने अध्यात्मिक- वैदिक ज्ञान पर पूरा भरोसा है कि उन्हें कोई भी चैलेंज नहीं कर सकता और तपस यात्रा अपने रास्ते को तैयार करते हुए पूरे भारत को नशा मुक्त, रोग मुक्त, शोक मुक्त भारत का संदेश देने का लक्ष्य तय किया है । जिसके तहत उन्होंने कठिन व जटिल तपस्या यात्रा व दंडवत यात्रा करने का कम पिछले कई महीने से जारी कर रखा है । इसी संकल्प के तहत अब स्वयं करौली शंकर महादेव अपनी तपस्थली के आसन से उठकर स्वयं लव कुश आश्रम करौली सरकार धाम से पैदल चलकर कानपुर के सरसैया घाट तक शोक मुक्त- रोग मुक्त – नशा मुक्त भारत के संकल्प को लेकर पदयात्रा करने का बीड़ा उठाया है ।करौली सरकार के शंकर महादेव के समर्थन में पूरे देश में शंकर सेना निरंतर के निर्धारित लक्ष्य को लेकर दिन रात शंकर सेना के सदस्य समर्पित रहते हैं इसी क्रम के तहत शंकर सेना उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सुबोध चोपड़ा ने बताया कि आरोप-प्रत्यारोप से हमारे ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता कलयुग है, सतयुग और द्वापर तक में तमाम श्रिषी मुनियों पर भी आरोप-प्रत्यारोप रूप लगे। उदाहरण के तौर पर डाकू अंगुलीमाल जो कि बाद में ऋषि वाल्मीकि के रूप में रामायण की रचना की। वहीं कालिदास जिन्हें महामूर्ख का दर्जा दिया जाता था उन्होंने पूरे विश्व को एक महाकाव्य लिखकर बता दिया कि व्यक्ति के अतीत को नहीं वर्तमान को देखो अतीत देखने वाले सिर्फ अपने कुंठा को दूर करने का काम करते हैं क्योंकि वह अपने जीवन से कुंठित रहते हैं और उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति को जो कि निस्वार्थ समाज के लिए उतरा हो उसके प्रति ऐसे लोगों के मन में आत्मग्लानि पैदा होने लगती है और वह आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगते हैं । फिर तो आज की यह मीडिया जो कब क्या कुछ न कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता । फिलहाल हमारे गुरुजी का अतीत चाहे जो भी रहा हो परंतु वर्तमान में वह एक आध्यात्मिक जीवन के तहत जीने का कार्य कर रहे हैं और जनता के प्रति अपनी तपस्या को समर्पित करने का काम कर रहे हैं ।श्री चोपड़ा ने तपस यात्रा के विषय पर बताया कि यह तपस यात्रा खास करके उन लोगों की है या उनके प्रति है जो आज भले चंगे होकर गुरु जी के आश्रम से मुक्त हुए हैं और जो आज गुरु की शरण में है वह इस तपस यात्रा में अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए सतत प्रयासरत हैं। इसी तपस यात्रा के गर्भ में करौली सरकार के शंकर महादेव ने एक संकल्प उठाया है कि भारत एक सनातन देश है और यहां सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है और यह तपस यात्रा सिर्फ और सिर्फ भारत देश की सनातनी गौरव को पूरे विश्व में फैलने का संदेश देने का कार्य है । जिस संकल्प के तहत करौली सरकार के शंकर महादेव ने यह संकल्प लिया है उनके प्रति सदभाव पूर्वक “शंकर सेना” करौली सरकार शंकर महादेव “गुरु जी” के साथ हमेशा कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए वचनबद्ध है । चोपड़ा ने तपस यात्रा के विषय पर नें बताया कि करौली आश्रम से चलकर सरसैया घाट पर यह तपस यात्रा समाप्त हुई । जहां रात 8 और 9 के बीच में गंगा मैया को विशाल चुनरी पहनाकर दीपदान करते हुए मां गंगा की महाआरती हुई । और प्रातःकाल गंगा आचमन व रुद्राभिषेक का कार्यक्रम होगा। इस बीच मौजूद वहां हजारों भक्त जलपान हुआ भोजन इत्यादि करते रहेंगे प्रातः रुद्राभिषेक के उपरांत आरती व प्रसाद वितरण होगा। और भक्तगणों को शुभ आशीर्वाद देकर वापस करौली आश्रम रवाना हो गया जो भक्तगण विशेष अनुष्ठान लेकर आए हैं चाहे वह नगर के हों या बाहर के वह सभी सरसैया घाट से करौली आश्रम तक वापस दंडवत यात्रा के तहत आएंगे ऐसा उन पर कोई जोर दबाव नहीं है। वह पदयात्रा के तहत भी वापस आ सकते हैं। बाकी उनकी अपनी परम इच्छा पर निर्भर है कि वह दंडवत यात्रा करके आते हैं या पदयात्रा करके आते हैं

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